जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन:जनता के नेता को जनता से ही खतरा, रोहिणी की किडनी के लिए घटाई जाएगी लालू की एंटीबॉडी

भीड़ में प्रोटोकॉल तोड़ जनता के बीच पहुंच जाना लालू की खासियत रही है। इसके लिए वह सुरक्षा कर्मियों को भी साइड कर देते थे। छात्र राजनीति से लेकर केंद्र की राजनीति में लालू की इसी दरियादिली ने अलग पहचान दिलाई है, लेकिन अब नए जीवन में लालू की लाइफ स्टाइल पूरी तरह से बदल जाएगी।

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अब उन्हें सोशल डिस्टेंस वाली जिंदगी जीनी होगी। या यू कहें तो जन के नेता को जनता से ही खतरा होगा, क्योंकि रोहिणी की किडनी को सेट करने के लिए लालू की एंटीबॉडी कम करनी होगी। ऐसी स्थिति में संक्रमण जानलेवा हो सकता है। जानिए कितनी चुनौतियों से भरा होगा लालू यादव का नया जीवन…

किस्मत वालों को नसीब होती हैं बेटियां

रोहिणी की किडनी के लिए घटाई जाएगी एंटीबॉडी

बिहार में 50 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले पटना के पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के एयचओडी तथा किडनी ट्रांसप्लांट के निदेशक डॉ अजय कुमार बताते हैं कि संसाधन हाईटेक है, इस कारण से प्रत्यारोपण का सक्सेस रेट काफी अधिक है। लेकिन लाइफ में चुनौती किडनी ट्रांसप्लांट के बाद होती है, क्योंकि पूरी लाइफ एक अलग प्रोटोकॉल के तहत जीना होता है। इंसान रोग प्रतिरोधक क्षमता से ही बीमारियों से लड़ता है, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट में रोग प्रतिरोधक क्षमता ही घटाई जाती है।

बाहरी अंग को एडजेस्ट कराने के लिए ही ऐसा करना होता है, जिसे मेडिकल भाषा में इम्यूनो सप्रेशन कहा जाता है। लालू यादव को रोहिणी आचार्य की किडनी ट्रांसप्लांट की गई है। रोहिणी की किडनी को लालू की बॉडी में एडजेस्ट करने के लिए इम्यूनो सप्रेशन ड्रग दी जाएगी जिससे उनकी एंटीबॉडी को कम किया जा सके जिससे शरीर बाहरी अंग के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ सके।

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कोरोना काल में पता चली एंटीबॉडी की ताकत

एंटीबॉडी की कीमत कोरोना काल में लोगों को पता चली, संक्रमण में वहीं कोरोना वायरस को मात दे पाया जिसकी एंटीबॉडी ठीक रही। कमजोर एंटीबॉडी वालों के जीवन पर कोरोना खतरा बना। डॉक्टर कमजोर और गंभीर रूप से बीमार मरीजों की एंटीबॉडी को लेकर ही उपाय करते हैं। आयुर्वेद और एलोपैथ से लेकर हर पैथी में एंटीबॉडी को लेकर ही काम होता है।

लेकिन अंग प्रत्यारोपण में लाइन ऑफ ट्रीटमेंट पूरी तरह से अलग होता है। अगर अंग प्रत्यारोपण के बाद एंटीबॉडी कम नहीं की गई तो मरीज का शरीर बाहरी अंग को बर्दाश्त नहीं करता है, ऐसे में मरीज के शरीर से उस अंग को बाहर निकालना पड़ जाता है। यही कारण है कि अंग प्रत्यारोपण के बाद एंटीबॉडी घटाने के लिए दवाएं दी जाती हैं।

लालू की बॉडी के लिए बड़ी ताकत भी जानिए

लालू यादव काफी दिनों से किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। किडनी का फंक्शन सही नहीं होने के कारण उन्हें कई साल से एक्सपर्ट ट्रीटमेंट में चलना पड़ रहा है। लेकिन इस सबके बीच सबसे बड़ी बात है कि लालू की किडनी ट्रांसप्लांट तक डायलसिस नहीं की गई है।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

एक्सपर्ट का कहना है कि अगर मरीज की डायलसिस शुरु हो जाती है, तो किडनी ट्रांसप्लांट के बाद भी मुश्किल अधिक होती है। लालू यादव का क्रिएटनिन लेवल बढ़ा और कई समस्या आई लेकिन वह हर बार डायलसिस से बच गए। डॉक्टर इस संकेत को अच्छा मान रहे हैं, हालांकि इसके बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट के बाद कदम कदम पर जोखिम बता रहे हैं।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

रोहिणी को चोट लगी तो मुश्किल

पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के एचओडी तथा किडनी ट्रांसप्लांट के निदेशक डॉ अजय कुमार का कहना है कि किडनी डोनर को भी संक्रमण से काफी बचाव करना पड़ता है। सबसे बड़ी समस्या किडनी की तरफ चोट लगना काफी खतरनाक होता है। किडनी डोनर को चोट से बचना होता है, किडनी की तरफ चोट लगने से संकट बढ़ जाता है।

किडनी डोनरों को हमेशा डॉक्टरों के संपर्क में रहना होता है। यूरिनल इंफेक्शन के साथ यूरिन में खून आना खतरनाक होता है। ऐसे किसी भी लक्षण पर डोनर को पूरी लाइफ गंभीर होना होता है। यूरिनल संक्रमण में तत्काल डॉक्टरों से संपर्क करना होता है। रोहिणी आचार्य के साथ भी ऐसी समस्या होगी। गंदगी और बीमार लोगों से दूरी बनाकर रखनी होगी। साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना होगा।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

अब लालू की लाइफ का बदल जाएगा प्रोटोकॉल

डॉ अजय कुमार का कहना है कि मरीजों की जगह और लाइफ स्टाइल डॉक्टर तय करते हैं। डॉक्टरों के अनुसार प्रोटोकॉल में चलना होता है। थोड़ी सी चूक जीवन पर खतरा बन सकती है। ऐसे में इसके लिए प्रोटोकॉल बनाया गया है जिससे मरीजों की लाइफ का खतरा कम किया जा सके। मरीजों को पूरी लाइफ दवा लेनी पड़ती है, शुरुआती 3 माह तक तो मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। इस दौरान उन्हें स्थान भी बदलने की इजाजत नहीं दी जाती है।

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लालू के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल

  • हमेशा मास्क लगाकर रहना होगा
  • कमरे में आने जाने वालों की संख्या कम होगी
  • मिलने जुलने वालों के लिए साफ सफाई का विशेष ध्यान
  • भीड़ भाड़ या सभा में जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा
  • कुत्ता बिल्ली के साथ अन्य पालतू जानवर नहीं होना चाहिए
  • ब्लड शुगर के साथ यूरिया क्रिएटनिन की लगातार जांच
  • पूरी लाइफ की दवा हर माह चलती रहती है
  • हर माह दवा पर 15 से 20 हजार का खर्च
  • घर के हर परिवार के सदस्य का मिलना जुलना कम

राजनेताओं के लिए किडनी ट्रांसप्लांट के बाद चुनौती

सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता के लिए किडनी ट्रांसप्लांट के बाद का समय काफी खतरनाक होता है। डॉ अजय कुमार का कहना है कि ऐसे लोगों का मिलना जुलना अधिक होता है। भीड़ में जाना और मेल-मिलाप करना मुश्किल पैदा करना होता है। ऐसे लोगों के लिए काफी सावधानी बरतनी होती है। ऐसे लोगों को जनता से पूरी तरह से अलग होना होता है।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

राजनेताओं का इतिहास रहा है कि जिसने भी किडनी ट्रांसप्लांट कराया, वह पब्लिक से दूर हो जाता है। जन संपर्क में आना ऐसे मरीजों के लिए काफी खतरनाक होता है। पूरी लाइफ जनता और भीड़ से दूर होना रहता है। इसमें कही से कोई शंका नहीं हो चाहिए। हाथ मिलाना तक दूर हो जाएगा। हमेशा दूर से सलाम दुआ करना होगा। ऐसे मरीजों के संपर्क में कोई बीमार आया तो संक्रमण हो सकता है। सभा और रोड शो करना तो जान का खतरा बढ़ा सकता है।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

अमर सिंह की लापरवाही से लेनी होगी सीख

किडनी ट्रांसप्लांट के एक्सपर्ट का कहना है कि जाने-माने सपा नेता अमर सिंह से सीख लेनी चाहिए। वह हाई ब्लड शुगर के मरीज रहे। किडनी खराब होने के बाद सिंगापुर में ही ट्रांसप्लांट कराया गया था। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अमर सिंह ने मेडिकल प्रोटोकाल का पालन नहीं किया।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

वह भीड़ में चले जाते थे और लोगों से मिलने जुलने में भी परहेज नहीं करते थे। इस कारण से वह संक्रमण की जद में हमेशा रहते थे। अमर सिंह की यही लापरवाही उनकी मौत का कारण बन गई।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

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एक्सपर्ट का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद भीड़ में आना जाना और संक्रमण ही उनकी मौत का कारण बन गया। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों को अमर सिंह की गलती से सीखना चाहिए, कोशिश करना चाहिए कि उससे यह गलती नहीं होने पाए। लालू यादव को भी मेडिकल प्रोटोकाल के हिसाब से चलना होगा, नहीं तो जोखिम के लिए तैयार रहना होगा।

किडनी ट्रांसप्लांट के एक्सपर्ट का कहना है कि जाने माने सपा नेता अमर सिंह से सीख लेनी चाहिए।
किडनी ट्रांसप्लांट के एक्सपर्ट का कहना है कि जाने माने सपा नेता अमर सिंह से सीख लेनी चाहिए।

सिंगापुर में होगा लालू का ऑब्जर्वेशन

डॉक्टरों का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों का ऑब्जर्वेशन काफी अहम होता है। इसके लिए मरीजों को ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर के संपर्क में रहना होता है। डॉक्टरों का कहना है कि लालू यादव की किडनी का ट्रांसप्लांट सिंगापुर में हुआ है, इस कारण से कम से कम 3 माह तक उन्हें वहां डॉक्टरों की निगरानी में रहना होगा।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

डॉक्टर एंटीबॉडी को कम करने के लिए दवाएं चलाएंगे और उसका असर देखेंगे। विदेशों में भी ऐसी व्यवस्था है कि ट्रांसप्लांट के बाद भी मरीज को 3 से 6 माह तक निगरानी में रखा जाता है। अस्पताल से तो टांका काटने के बाद छोड़ दिया जाता है, लेकिन निगरानी में रहना होता है। अचानक से कोई दिक्कत न हो इसके लिए भी डॉक्टरों के संपर्क में रहना होता है। क्योंकि कोई न कोई परेशानी बनी रहती है।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

सीवियर निमोनिया और डायरिया जनलेवा

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दो बड़ी चुनौती जानलेवा हो सकती है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद इम्यूनिटी घटाई जाती। इस कारण से संक्रमण का खतरा बना रहता है। ऐसे मरीजों को दो संक्रमण जानलेवा बनता है। इसमें सीवियर निमोनिया यानि चेस्ट इंफेक्शन और जीआई ट्रैक इंफेक्शन का खतरा होता है।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

डॉक्टर अजय कुमार का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अगर मरीजों को सीवियर निमोनिया हुआ या फिर जीआई ट्रैक इंफेक्शन हुआ तो खतरा बढ़ जाता है। सीवियर निमोनिया से सांस में बाधा होती है जबकि जीआई ट्रैक इंफेक्शन से डायरिया जानलेवा बन जाता है। किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को हमेशा इन दो इंफेक्शन से बचाव के लिए गंभीर रहना होगा, इसके लिए मेडिकल प्रोटोकाॅल का पालन करना होता है।जानिए कैसा होगा लालू का नया जीवन

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